मै पिछले ढाई साल से एक ngo के साथ जुड़ी हुई हूँ।वहाँ मै छोटे अनाथ बचों को पढ़ाती हूँ।वहाँ जाकर जो मैंने शिक्षा का हाल देखा मुझे बहुत दुःख हुआ।सभी बच्चे स्कूल तो जाते हैं, लेकिन वहाँ वे क्या पढ़ते हैं ये मुझको नहीं पता।चौथी क्लास के बच्चे को क ख़ ग भी नहीं आता था। पूछने पर पता चला की अध्यापिका कक्षा में आती हैं, ऒर ब्लैक बोर्ड पर लिख देती हैं और बच्चे उसको अपनी कॉपी में लिख लेते हैं।जो बच्चे अनाथ हैं उनकी और थोड़ा ज्यादा तवज्जो देना चाहिये ताकि वो जिंदगी मे कुछ कर सके।अग़र एक सभ्य समाज बनाना है तो मुझे लगता है कि सबको इस और ध्यान देना चाहिये।टीचर बेफिक्र हैं क्योंकि बच्चों को कक्षा आठ तक फेल नहीं कर सकते।बच्चे भी पढ़ाई को लेकर बेफिकर हैं की हम फेल नहीं हो सकते।ये हमारे बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाढ हो रहा है जिसकी ओर सरकार को ध्यान देना चाहिये।शिक्षा के स्तर को अच्छा बनाने के लिये जरूरी है इस क्षेत्र में कढ़े कदम उठाना।गरीब बच्चों के माँ बाप उनको पैसे के लालच में भेज देते हैं स्कूल, अब बच्चा क्या पढ़ रहा है इस पर वह भी ध्यान नहीं देते।वो इतने गरीब हैं की बस पैसा मिल रहा है इसी से वे खुश हो जाते हैं।
आखिर इन बच्चों के भविष्य की जिम्मेदारी किस पर है माँ बाप पर अध्यापिकों पर या समाज पर।सोचिए?
Sunday, 7 February 2016
सरकारी स्कूलों में गिरता शिक्षा का स्तर
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I wish and hope there are more people out there like you mom! You are an amazing human being!!!
ReplyDeleteI wish and hope there are more people out there like you mom! You are an amazing human being!!!
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