हम सभी जानते हैं कि पॉलीथिन से कितना पर्दूषण फैलता है।फिर भी हम कुछ नहीं करते, क्योंकि हम कुछ करना ही नहीं चाहते।सिर्फ बातें ही करते हैं कि कितना गंद फैलता है।
हमको चाहिए कि, हम घर से थैला ले कर जाएं।कुछ लोग लेकर जाते है, लेकिन कुछ लोगों से कुछ नहीं होग़ा। ये हम सबकी ज़िमेदारी है मुझको याद है जब मैं छोटी थी मेरी माँ बाज़ार थैला लेकर या कैन की टोकरी लेकर जाती थी।ये कोई ज्यादा पुरानी बात नहीं ,सत्तर के दशक की बात है।उस समय इतना पर्दूषण नहीं था।आज हम टेक्नोलॉजी में चाहे कितना भी आगे बढ़ गए हैं लेकिन उतना ही हम अपने वातावरण को प्रदूषित कर रहे हैं। लोग जानवरों के लिये खाना भी पॉलीथिन में बाँध कर फैंक देते हैं
।खाना खाने के लालच मे गाय और अन्य जानवर पॉलीथिन भी खा जाते हैं।
जिसके कारण जानवर की मृत्यु हो जाती है।पॉलीथिन को गलने मे सालों साल लग जाते हैं।
हमारे देश मे कानून तो बनते है, लागू भी होते हैं लेकिन कोई मानता नहीं।
कानून सख्त ना होने की वजह से किसी को डर नहीं।दिल्ली में हर और पॉलीथिन नज़र आते हैं।
बरसातों में सारे गटर ओवर फलो हो जाते हैं। मेरी सभी से यही बिनती है कि घर से बैग लेकर जाओ।जिससे कम कचरा फैलेगा।अपने शहर को खूबसूरत बनाना सरकार का ही नहीं
हमारा भी काम है।आओ अपने देश और शहर को सुन्दर बनाने का प्रण लें।पॉलीथिन को हाथ ना
लगाएँगे थैला हम अपनायेंगे।
Wednesday, 10 February 2016
पॉलीथिन का पॉल्युशन
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