दीवाली के आते ही हर कोई बहुत खुश होता है।घरों की सफाई शुरू हो जाती है।
नई नई चीज़ें घर आती हैं।सबसे ख़ुशी की बात तो ये होती है की बच्चों के लिये नये कपड़े लिये जाते हैं।और तो और भगवान भी नए लाय जाते हैं । उनको बहुत ही प्यार से घरों में सजाया जाता है।
दिवाली वाले दिन बहुत ही श्रद्धा से पूरा परिवार बैठ कर लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा करता है।
माँ भी कहती है बेटा भगवान जी को गंदे हाथ नहीं लगाना।
दिवाली बीत जाने के बाद बेचारे भगवान् को भी लोग उनकी जगह दिखा देते हैं।
भगवान जी को उठा कर किसी भी पेड़ के नीचे रख दिया जाता है।
सारे फूल और सामान के साथ।अब पेड़ के नीचे बेठे
भगवान सोचने पर मजबूर हो जाता है कि, क्या यही भक्ति है?जो परिवार मुझको इतनी श्रद्धा से घर लाया था, अब मुझको पेड़ के नीचे किसी रख कर चला गया है।
और पेड़ के नीचे रखे उस सामान पर जानवर गन्दा करते हैं।
क्या पढ़े लिखे लोग इतना नहीं जानते कि इस तरह वो भगवान्
का कितना अपमान करते हैं।मेरा इतना कहना है कि अगर सारा सामान फैकना ही है तो चांदी के लक्ष्मी गणेश लो और उसे हर दिवाली पर पूजा में रखो।इससे ना हमें हर साल भगवान खरिदने पढ़ेंगे ना
ही पेड़ के नीचे बैठाने पढ़ेंगे।
Monday, 8 February 2016
दिवाली के बाद भगवान की हालत
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