Monday, 15 February 2016

मेरी मॉं बोली

बच्चे अपनी माँ से जो भाषा सबसे पहले बोलना सीखते हैं, उस भाषा को माँ बोली कहते हैं।लेकिन आज के नए युग मे माँ बोली ईगंलिश हो गई है।कयोकि कोई भी
अपनी मातृ भाषा बोलना ही नही चाहता।सभी को इग्लिश
सिखाने की होड़ लगी हुई है।नई पीढ़ी के लोग यह नही समझ पाते कि दुसरी औऱ तीसरी भाषा तो बच्चे सकूल मे सीख ही लेंगे ।सबसे पहले हमे  को अपनी भाषा सिखानी चाहिए ताकि बच्चे को अपने दादा दादी के साथ बात करने मे कोई परेशानी ना हो।कई बार देखने
मे आया है कि बच्चे जब अपने माँ पापा के साथ
अपने गांव जाते हैं तो वहाँ उनको अपने बड़ों के साथ बात करने मे बहुत परेशानी होती है।अभी भी गांव मे कई लोग बहुत  ज्यादा पढे. लिखे नहीं हैं।
ऐसे मे ना तो बच्चे उनकी बात ठीक से समझ पाते हैं
ना अपनी बात समझा पाते हैं।ऐसे संसकारों का कया फायदा जो भाषा के आभाव मे अपनो को अपने से दूर कर दे।यह माता पिता का फर्ज़ है कि वह अपने बच्चे  को अपनी भाषा की इज़त करनी सिखाएँ ।कोई भी भाषा किसी से कम नही होती।

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