Saturday, 20 February 2016

हमारे टैक्स का दुरुपयोग

हमारे मेहनत की कमाई का एक हिस्सा जो टैक्स के रूप में हमारी सरकार को जाता है ,उसकी बर्बादी कैसे होती है यह देखने वाली बात है।
आजकल हर चौराहे पर और हर सड़क के किनारे अर्द्ध गोलाकार बना दिये गए हैं ताकि चौरस किनारों से
किसी को नुक्सान ना हो।वैसे तो यह बहुत
अच्छा काम है, लेकिन अगर इस काम को ज़िमेदारी के साथ किया गया होता तो ज्यादा अच्छा होता।ये अर्द्ध गोलाकार कब बने और कब टूट गए पता ही नहीं चला।
सभी चौराहे और सड़कों का यही हाल है।कुछ दिन पहले सब टूटे हुए थे, अब उनको उठा कर वैसे ही प्लास्टर लगा कर जोड़ दिया गया है।मेरा कहना यह है कि जो इंजीनियर इस काम को देखते हैं क्या
उनको पता नहीं कि, रेत और सीमेन्ट का रेशो
क्या होता है जिससे बनाया गया मिक्सचर मज़बूत हो।या फिर इंजीनियर और ठेकेदार की मिलीभगत का
नतीज़ा है ये सड़क के किनारे बने हुये ये अर्द्ध गोलाकार
इतने कमजोर हैं कि एक साइकिल की टक्कर से ही टूट जाएं।क्यों नहीं ऐसे काम करते जो सालों तक चलें।
जितना पैसा का ठेका इनको मिलता है उसका आधा भी लगा दें तो बड़िया काम हो।लेकिन अगर सौ रूपय में से पच्चीस रुपये ही लगाने हैं तो ऐसा ही काम होगा।जरूरत है ऐसे इंजीनियर और ठेकेदारों की नकेल कसने की।लेकिन करेगा कौन? सभी तो मिले हुए होते हैं।चोर चोर मौसेरे भाई।

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