आजकल शहरों में चलन है सफाई का, और वो भी बहुत जोर शोर से। किसी भी एक नेता को बुला लिया जाता है। इसके लिए पहले से ही प्रचार शुरू हो जाता है। उस क्षेत्र के जाने माने लोग भी आ जाते हैं। नेता जी के साथ मिल कर खूब सफ़ाई होती है और खूब फ़ोटो
निकाले जाते हैं। नेता जी के जाने के बाद सभी चले जाते हैं। उसके बाद सब उस जगह के बारे में भूल जाते हैं। उस जगह पर फिर से गंदगी जमा होने लग जाती है।लोग छोटे छोटे बने हुये शॉपिंग मॉल में आते हैं जो सोसाईटी के पास ही बने होते हैं, ताकि लोग अपनी जरूरत का सामन ख़रीद सकें। इन दुकानों पर हर सामान मिल जाता हैं। साथ में छोटे छोटे दुकान दार
जैसे चाट वाला आइसक्रीम वाले भी बैठ जाते हैं। अब हमारे जैसे ही लोग जो पढ़े लिखे होते हैं
अपने बच्चों को लेकर जाते हैं। वह अपने बच्चों को आइसक्रीम या कुछ और भी लेकर देंगे तो
उस खाने का कवर वंही फैंक देंगे। अब जगह
जगह कुढ़े दान होने के बावज़ूद इधर उधर कुढ़ा
डालेंगे तो गंद तो फैलेगा। अब इसके जिम्मेदार तो हम खुद ही हैं, तो बजाए एक दिन सफ़ाई करने के, अगर हम यह सोच लें की हमको गंद नहीं डालना है तो
हमारा शहर खुद ब खुद ही साफ़ रहेगा। तो हमारा नारा होना चाहिए। गंद नहीं फैलाना है शहर को सुंदर बनाना है।
Thursday, 18 February 2016
एक दिन की सफाई
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