क्या याद है तुमको मेरी माँ, या तुम मुझको भुल गयी।।
जन्म दिया था जिसको तुमने, उससे ही तुमदूर हुई।
खड़ी हुई चोराहे पर में ये सोचा करती हूँ,
छूट गया माँ आंगन तेरा जहाँ मै खेला करती थी।
छूट गए सबसंगी साथी, टूट गए सपने सारे।
ना गलती थी मेरी कोई ना ग़लती थी तेरी।
ऊपर वाले की गलती ने दुनिया बदली मेरी।
बीच खड़ी चौराहे पे मैं मांगू सबसे भीख।
कोई देता मुझे गालियां कोई देता सीख।
गला दबा देती माँ मेरा,
मै ना करती शिकवा।ना दुनिया में मेरा कोई ना मेरा कोई रिश्ता।
जाऊँगी जब मै दुनिया से क्या कोई रोयेगा।
एहसास मेरे जाने का माँ क्या तुम कर पाओगी,
चली गई है बेटी मेरी क्या ये कह पाओगी
Saturday, 6 February 2016
हिजड़ा
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