Monday, 9 May 2016

मंदिरों में वयवस्था की कमी

अभी हाल ही मे हम अपने ग्रुप के साथ माउन्ट आबू गए।वहां घूमने के बाद हम लोग अम्बा जी के दर्शन करने के लिए गए।अम्बा जी का मन्दिर बहुत ही भव्य है।सफ़ेद मार्बल से बना हुआ मन्दिर जो आपको
बहुत ही आकर्षित करता है।जैसे ही हम आगे बड़े दो पुलिस वाले जिनमें एक लेडी पुलिस भी थी जो की बहुत ही गंदे तरीक़े से आपका सामान चैक कर
रही थी।वहां से आगे बड़े तो मंदिर में परवेश करने के रास्ते सफ़ेद मार्वल का फर्श था।फर्श इतना गर्म था कि हम लोगों के पैर जल रहे थे।
कंही कंही टाट था लेकिन जगह जगह से इकठ्ठा हो रखा
था।चलो हम और आगे बड़े, कुछ लोगों ने अगर-बत्ती और नारियल हाथ में लिया हुआ था।आगे बड़े तो एक पुलिस वाला बोला कि नारियल यहाँ साइड में एक जगह बनाई हुई थी वहाँ तोड़ कर फिर ले कर जाओ।
यहाँ नारियल तोड़ रहे थे वहाँ नारियल का पानी नाली में बह रहा था और बहुत ही बदबू आ रही थी।सभी जानते हैं कि नारियल पानी कितना उपयोगी होता है।कितना नारियल पानी बरबाद होता है किसी को कोई परवाह नहीं।और आगे गये तो पानी पीने का कूलर लगा हुआ था।कूलर का पानी खारा और गर्म था।कूलर काम नहीं कर रहा था।हमने गर्म और खारा पानी पी कर ही
प्यास बुझा ली।जैसे तैसे धका मुकी करके हमने माँ अम्बे के दर्शन कर लिये।मन्दिर बहुत ही विशाल और भवय था।सोने का वर्क चढ़ा हुआ खूबसूरत मंदिर।चलो माँ के दर्शन हो गए।अब हम लोग बाथरूम जाना चाहते थे।
किसी से पुछा तो उसने रास्ता बता दिया।वहां जा कर जो दृश्य देखा मेरे तो होश उर गए।एक 8/6 फीट की जगह में पुराने जमाने का ओपन बाथरूम था।ना वहां इंडियन टॉयलेट थी ना इंग्लिश।बस सब ऐसे ही एक दूसरे के सामने ही बेठै हुये थे।इतना बड़ा मन्दिर और इतना चढ़ावा चढ़ता है लेकिन भक्तों के लिये जन सुविधाओं की इतनी कमी।इतना पैसा श्रद्धालु चढ़ाते हैं क्या उनके लिये पीने के पानी और शौचालय की कमी क्यों।ये मदिरों की इतनी कमाई का कोई हिसाब नहीं।कम से कम इतना पैसा आता है लंगर का प्रबन्ध हो ठंडे पानी का प्रबन्ध हो ।जनसुविधाओं का प्रबन्ध हो ताकि विदेशी आए तो हमारी व्यवस्था की तारीफ़ करें।वो ये सब देख कर सोचते होँगे कितना गरीब देश है।

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